जाड़ जब आवे त लगे आके सट गईल
ई कवन चाल हवे मार के पलट गईल
झूठ बोल के झगरा लगा दिहलस छिनरी
पूछे जब गईनी त बात से उलट गईल
गाछ पर चढ़ाके कहलस कूदs हम बचा लेब
कूद जब गईनी त धीरे से हट गईल
डोरा मांगी पईंचा हम खूब ढिल्ली छोड़नी
दोसरा से फंस के पतंग हमार कट गईल
फुहरी के लईका के संगे रही -रही के
गारी हमार बाबू त सुग्गा नियर रट गईल
पास हम कर गईनी बिना कुछ पढ़ले
जे रहे पढ़ले ऊ परीक्षा से छंट गईल
मार -काट दंगे में निकलल बा नतीजा
मियां के लईकी अगर हिन्दू से पट गईल
आपन जे ठुकरईली पिरितिया हमार
भगवानो पर से विस्वास हमार हट गईल