आजकल गाने की जबर्दस्त धूम है- ‘मुन्नी बदनाम हुई डार्लिग तेरे लिए..’! टीवी के हर चैनल पर ‘बदनाम’ होकर मुन्नी नाम कमा रही है। लेकिन कानों में पड़ते ही फिल्म ‘दबंग’ का यह गीत हमें अतीत की ओर खींचता है, जहां इसी गीत के बोल कुछ बदले हुए हैं- ‘लौंडा बदनाम हुआ नसीबन तेरे लिए..’।
‘दबंग’ के डायरेक्टर अभिनव कश्यप से पूछने पर पता चलता है- ‘यह यूपी-बिहार का लोकगीत है, जिसे मैं बचपन से सुनता आ रहा हूं। मस्ती के मूड में लिखा गया यह गाना किसी ख़ुराफ़ाती दिमाग़ की उपज है, इसलिए हमारी फिल्म में जब सिचुएशन निकली कि शादी-ब्याह में बजने वाला नौटंकी टाइप का डबल मीनिंग गाना चाहिए.. ललित पंडित ने मुझे ‘मुन्नी..’ की धुन सुनाई, तो मैं उछल पड़ा.. बस, मुझे यही चाहिए!’ चूंकि अभिनव यूपी में ही पले-बढ़े हैं, लिहाज आवश्यकता पड़ने पर उन्होंने अनुभव को ही अपना रेफरेंस बनाया। लेकिन बॉलीवुड की ऐसी तमाम फिल्में हैं, जिनमें लोकगीतों का इस्तेमाल धड़ल्ले से हुआ है।
हाल की ही फिल्मों की बात करें, तो ‘दिल्ली-6’ और ‘पीपली लाइव’ में छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का न सिर्फ़ बख़ूबी उपयोग किया गया, बल्कि उन्हें लोकप्रियता भी काफ़ी मिली। जी हां, हम ‘ससुराल गेंदा फूल..’ और ‘सखी सैंया तो खूबई कमात हैं..’ जैसे गीतों की बात कर रहे हैं।
इस बारे में सुप्रसिद्ध गीतकार समीर बताते हैं- ‘यह कोई नई बात नहीं है। हुस्नलाल-भगतराम और नौशाद के जमाने के भी लोकगीत हमारी फिल्मों में आए हैं। फिर ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है..’ (‘लावारिस’) और ‘रंग बरसे..’ (‘सिलसिला’) भी तो पहले लोकगीत ही था न! यहां तक कि गुलजार साहब को जिस ‘चल छैंया छैंया..’ के लिए ख़ूब वाहवाही मिली, वह भी पंजाब का फोक सॉन्ग है.. इसे सूफ़ी गायक बुल्ले शाह गाया करते थे।’
वैसे समीर भी लोकगीत-प्रेम से अछूते नहीं हैं। बनारस से ताल्लुक रखने वाले समीर के पिता अनजान ने ‘आज का अर्जुन’ के लिए ‘साढ़े तीन बजे मुन्नी जरूर मिलना..’ लिखा, तो बेटे ने लाइन ही लगा दी- ‘बगल वाली आंख मार है..’ (‘खुल्लम खुल्ला प्यार करें’), ‘सरकाय लेओ खटिया जाड़ा लगे..’ (‘राजा बाबू’), ‘मैं आई हूं यूपी बिहार लूटने..’ (‘शूल’) आदि। इसी तरह सुप्रसिद्ध गीतकार आनंद बख्शी का गीत ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी..’ (‘विधाता’) असल में हमारे बुंदेलखंडी गीत से उठाया गया है, जिसके बोल हैं- ‘पनघट पे खड़ी चार गुइयां बताओ सखी कैसे हैं सइयां..’।
सवाल यह उठता है कि लोकगीतों में कुछ शब्दों का हेर-फेर करके फिल्मों के लिए अपना नाम दे देना क्या उचित है? बहरहाल, ढेर सारे बॉलीवुड के कई गीतकार वजह जो भी रही हो, लोकगीतों से ‘इंस्पायर्ड’ जरूर रहे हैं! समीर इस आरोप से इंकार करते हैं- ‘फोक पर कानूनी हक़ का दावा कोई नहीं कर सकता। इसीलिए ‘हम न जइबे..’, ‘कैसे बनी कैसे बनी.. ’, ‘चने के खेत में..’, और ‘टपकी जाए जलेबी..’ जैसे गाने सुन हमें फोक की याद आती है।’
अभिनव की मानें तो लोकगीतों के रचयिता गुमनामी में रह जाते हैं, इसलिए उन्हें मालूम ही नहीं कि ‘लौंडा बदनाम..’ असल में लिखा किसने था? ‘पिछली सदी के नौवें और आख़िरी दशक में यह गीत ताराबानो फैजाबादी गाती थीं। वे न केवल गुलशन कुमार की खोज थीं, बल्कि ‘टी-सीरीज’ के अंतर्गत इस गीत का उनका एलबम भी रिलीज हुआ था।
चूंकि इसके बावजूद ताराबानो की पहचान एक स्ट्रीट सिंगर के रूप में रही.. ढोलक-हारमोनियम लेकर वे कहीं भी शुरू हो जाती थीं। मेरे ख्याल से ‘मुन्नी..’ के लिए उन्हें क्रेडिट तो मिलनी ही चाहिए थी।’ लेकिन अभिनव इससे सहमत नहीं हैं- ‘कवर वर्जन तो बहुत से लोगों ने गाए होंगे, पर इसके ओरिजिनल सोर्स के बारे में कौन जानता है? मैंने अगर किसी एक को क्रेडिट दे दी, तो कई लोग खड़े हो जाएंगे कि मैंने गाया है। सो, मैं इस क्रेडिट के पचड़े में पड़ूंगा ही नहीं!’
बहरहाल, सुप्रसिद्ध फिल्मकार टूटू शर्मा के मुताबिक़, ‘पहले की तरह इंडस्ट्री में फोक सॉन्ग का भरपूर इस्तेमाल शुरू से होता आया है। लेकिन यूपी-बिहार की आबादी चूंकि बहुत अधिक है, इसलिए फिल्मों में वहां का लोकगीत-संगीत रखना फ़ायदेमंद होता है।’ बहरहाल, यह तो अच्छी बात है कि आमिर ख़ान ने छत्तीसगढ़ तक सीमित रहे एक लोकगीत (‘सखी सैंया तो खूबई कमात हैं..’) को आज पूरे देश के घर-घर तक पहुंचा दिया है!
चर्चित रहे कुछ लोकगीत
गीत / फिल्म / गीतकार
‘चलत मुसाफ़िर मोह..’ / ‘तीसरी क़सम’ / शैलेंद्र सिंह
‘पान खाए सैंया हमारो..’ / ‘तीसरी क़सम’ / शैलेंद्र सिंह
‘दइया रे दइया चढ़ गयो..’ / ‘मधुमति’/ शैलेंद्र सिंह
‘दइया रे दइया लाज मोहे..’ / ‘लीडर’ / शकील बदायूंनी
‘सात सहेलियां खड़ी खड़ी..’ / ‘विधाता’ / आनंद बख्शी
‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या ..’ / ‘लावारिस’ / आनंद बख्शी
‘रंग बरसे भीगे चुनर..’ / ‘सिलसिला’ / हरिवंश राय बच्चन
‘इन्ही लोगों ने ले लीना..’ / ‘पाकीजा’ / मजरूह सुल्तानपुरी
‘चढ़ गया ऊपर रे अटरिया पे..’ / ‘दलाल’ / माया गोविंद
‘अंखियों से गोली मारे..’ / ‘दूल्हे राजा’ / समीर
‘बगल वाली आंख..’ / ‘खुल्लम खुल्ला प्यार करें’ / समीर
‘सरकाय लेओ खटिया जाड़ा लगे..’ / ‘राजा बाबू’ / समीर
‘मैं आई हूं यूपी बिहार लूटने..’ / ‘शूल’ / समीर
‘आरा हीले छपरा हीले..’ / ‘अपने दम पर’ / योगेश
‘भरतपुर लुट गया.’ / ‘इंगलिश बाबू देसी मेम’ / योगेश
‘ससुराल गेंदा फूल..’ / ‘दिल्ली-6’ / प्रसून जोशी
‘एक चुम्मा तू मुझको..’ / ‘छोटे सरकार’ / रानी मलिक
‘चल छैंया छैंया..’ / ‘दिल से’ / गुलजार