writer/film producer
रविवार, 19 सितंबर 2010
शब्द कागज पर बईठते नइखे
कविता उलझल बा सीना में
मिसरा अंटकल बा ओठ पर
शब्द कागज पर बईठते नइखे
उड़त रहता तितलियन नियर
कब से बईठल बानी ये प्रिये
सादा क़ागज पर लिख के तहार नाम
बस तहरे नाम पूरा बा
का एहू से निमन कवनो कविता होई
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