सोमवार, 30 अगस्त 2010
इंदीवर
1963 में बाबूभाई मिस्त्री की संगीतमय फिल्म ’पारसमणि‘ की सफलता ने इंदीवर की शोहरत को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। उनकी जोड़ी मनोज कुमार के साथ खूब जमी
’छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए, ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए, प्यार से भी जरूरी कई काम है, प्यार सबकुछ नहीं आदमी के लिए..।‘ इस गीत को गुनगुना किसे अच्छा नहीं लगता। लेकिन इस गीतों को शब्दों में पिरोना आसान नहीं। यह तो इंदीवर ही थे जिन्होंने कविताओं को फिल्मी गीतों में ढालकर उन्हें अमर बना दिया। ’नदिया चले, चले रे धारा, चन्दा चले, चले रे तारा, तुझको चलना होगा..‘ यह क्या है, कविता ही तो है। ऐसे गीतों के रचनाकार श्यामलाल बाबू राय उर्फ इंदीवर का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी में वर्ष 1924 में हुआ था। बचपन से ही छोटी-छोटी कविताएं लिखते और गीतकार बनने का सपना देखा करते थे। बड़े हुए तो मायानगरी मुंबई पहुंच गए। जमकर धक्के खाए और तब जाकर मिली फिल्म ’डबल क्रास‘ जो 1946 में रिलीज हुई। कहा जाता है न कि समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता। यही इंदीवर पर लागू होती है। फिल्म ’डबल फेस‘ के बाद अगले पांच साल तक उनके फिल्मी करियर में क्रॉस लगा रहा। तब आया साल 1951 और रिलीज हुई फिल्म ’मल्हार‘। जिसमें उन्होंने बड़े अरमान से गीत लिखा, ’बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसम‘ जिसने इतनी धूम मचाई कि वो रातोंरात स्टार बन गए। 1963 में बाबूभाई मिस्त्री की संगीतमय फिल्म ’पारसमणि‘ की सफलता ने इंदीवर की शोहरत को बुलंदियों पर ला खड़ा किया। उनकी जोड़ी मनोज कुमार के साथ खूब जमी। उन्होंने फिल्म ’उपकार‘ के लिए ’कस्मे-वादे, प्यार वफा का..‘ जैसे दिल को छू लेने वाले गीत लिखकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। फिल्म ’पूरब और पश्चिम‘ के लिए उन्होंने ’दुल्हन चली, वो पहन चली..‘ और ’कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे..‘ जैसे गीतों को लिखकर फिल्मी जगत में तहलका मचा दिया। कल्याणजी-आनंदजी के साथ मिलकर उन्होंने ’छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए..‘, ’चंदन-सा बदन..‘, ’मै तो भूल चली बाबुल का देश..‘ गीत दिया जो आज भी गाये और गुनगुनाए जाते है। 1970 में फिल्म आई थी ’जानी मेरा नाम‘। इसमें ’नफरत करने वालों के सीने में प्यार भर दूं..‘ और ’पल भर के लिए कोई मुझे प्यार कर ले..‘ जैसे रूमानी गीत लिखकर उन्होंने तहलका मचा दिया। फिल्म ’सच्चा-झूठा‘ का गीत ’मेरी प्यारी बहनियां बनेगी दुल्हनियां..‘, फिल्म ’सफर‘ के गीत ’जीवन से भरी तेरी आंखें और ’जो तुमको हो पसंद..‘ जैसे गानों को लिखकर उन्होंने इतिहास रचा। राकेश रोशन की फिल्मों में उन्होंने ऐसे सदाबहार गाने लिखे जो आज भी बखूबी याद किए जाते है। इनमें ’कामचोर‘, ’खुदगर्ज‘, ’खून भरी मांग‘, ’काला बाजार‘, ’किशन कन्हैया‘, ’करण-अजरुन‘ प्रमुख है। करीब तीन सौ गीतों के रचनाकार इंदीवर के गीतों को किशोर कुमार, आशा भोंसले, मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर आदि ने अपनी आवाज दी है। ’ना कजरे की धार ना मोतियों के हार, ना कोई किया सिंगार, फिर भी कितनी सुंदर हो‘, ’पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले..‘ आदि गानों को कौन भुला सकता है। 1975 में प्रदर्शित फिल्म ’अमानुष‘ के लिए इंदीवर को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया जिसे किशोर कुमार ने गाया था। 27 फरवरी, 1999 को इंदीवर ने इस दुनिया से विदा ले ली।
