writer/film producer
शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010
आँसुओं से नयन तर हैं देखिए
खौफ के मंजर उधर हैं देखिए
आँसुओं से नयन तर हैं देखिए
देखते थे बैठकर सपने जहाँ,
आज वो घर खंडहर हैं देखिए
हैं कहीं लाशें, लहू, क्रंदन करुण,
मातमी जद में सफर हैं देखिए
आदमीयत का है ये इम्तहां 'मुकेश',
कब से जख्मी मुंतजिर हैं देखिए
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